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कक्षा- 6 पाठ –पार नज़र के

पाठ योजना

विषय हिंदी

कक्षा- 6

पाठपार नज़र के (लेखक- जयंत विष्णु नार्लीकर)

 

लक्षित अधिगम उद्देश्य-

1. विद्यार्थी पाठ में प्रयुक्त भाषा तत्व एवं कठिन शब्दों के शुद्ध रूप को पहचान कर उनके बारे में   प्रत्यास्मरण कर सकेंगे।

2. विद्यार्थी विज्ञानिक सोच के लिए प्रेरित होंगे |

3. विद्यार्थियों की कल्पना शक्ति का विकास होगा |

4. विद्यार्थी प्रकृति के अत्याधिक दोहन से होने वाली भविष्य में होने वाली परेशानियों के प्रति जागरुक बनेंगे |

5. विद्यार्थी वृध्दि संधि व विशेषण संज्ञा बनाना जानेंगे |  

सहायक सामग्री- श्यामपट्ट ,डस्टर, संकेतक, चित्र ,मॉडल तथा अन्य कक्षा उपयोगी उपकरण।

उद्देश्य कथन- बच्चों आज हम जयंत विष्णु नार्लीकर द्वारा लिखित पाठ “पार नज़र के”  नामक पाठ का अध्ययन करेंगे।

विषय वस्तु

सार-

यह कहानी मंगल ग्रह की है। मंगलवासी सतह के नीचे रहते थे। छोटू अपने पापा सिक्योरिटी-पास लेकर सुरंग में चला गया। उसके पापा हर दिन उसी सुरंग से होकर अपने काम पर जाते थे। आम लोगों को उस रास्ते से जाने की मनाही थी, केवल चुनिंदा लोग ही जा सकते थे। छोटू के पापा की उस दिन छुट्टी थी इसलिए वह छिपाकर पास लेकर चल पड़ा था। सिपाही छोटू को पकड़कर वापस उसके घर छोड़ आए। पापा ने उसे बचा लिया।


     पापा ने छोटू को बताया कि वह जमीन के ऊपर काम करते हैं। आम आदमी वहाँ नहीं

जा सकता क्योंकि वहाँ के माहौल में नहीं रह सकता। वह वहाँ स्पेस-सूट पहनकर जाते हैं जिससे ऑक्सीजन मिलता है और खास किस्म के जूतों तथा प्रशिक्षण के कारण ही वहाँ

चल-फिर सकते हैं।

 पापा ने छोटू को बताया कि पहले ऐसा नहीं था। पहले मंगल ग्रह के सभी लोग ज़मीन के ऊपर रहते थे बगैर किसी विशेष सूट की मदद के परन्तु सूरज में परिवर्तन होने के कारण प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया। सभी पशु-पक्षी, पेड़-पौधे इसे सहन नहीं कर पाए और धीरे-धीरे समाप्त हो गए। उन्होंने तकनीकी ज्ञान के आधार पर जमीन के नीचे घर बना लिया और रहने लगे।


  दूसरे दिन उसके पापा जब काम पर गए तो कम्प्यूटर से पता चला कि एक अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह की ओर बढ़ रहा है और उसमें से एक यांत्रिक हाथ बाहर निकल रहा है। कॉलोनी प्रबंध समिति की मीटिंग बुलाई गई।

 

  उस दिन पापा छोटू को कंट्रोल रूम लेकर आए थे। पापा ने छोटू को एक कंसोल दिखाया जिसपर कई बटन थे। अंतरिक्ष यान से एक यांत्रिक हाथ बाहर निकला और जमीन की ओर बढ़ने लगा। सब लोग स्क्रीन पर देख रहे थे परन्तु छोटू की नज़र कंसोल के ऊपर थी। छोटू ने कंसोल पर बने लाल बटन को दबा दिया। खतरे की घंटी बजी और सब कंसोल की तरफ देखने लगे। छोटू के पापा ने उसे एक थप्पड़ मारा और लाल बटन को पहले की तरह कर दिया परन्तु तब तक लाल बटन ने अपना काम कर दिया था और यांत्रिक हाथ की गतिविधि रुक गयी थी।



    उधर धरती पर नासा ने अपना बयान जारी कर कहा कि मंगल की धरती पर उतरा हुआ अंतरिक्ष यान का यांत्रिक हाथ बेकार हो गया है। ठीक करने का प्रयास जारी है। उसने मंगल के मिट्टी के नमूने लेने शुरू कर दिए हैं। पृथ्वी की तरह मंगल पर भी जीव सृष्टि का अस्तित्व है यह आज भी एक रहस्य है।

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